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Bihar EV Charging Station: बिहार में हाईवे किनारे बनेंगे इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन

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बिहार सरकार जून 2026 से राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने जा रही है। ढाबों, पेट्रोल पंपों, होटलों और सरकारी जमीनों पर आधुनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा।

पटना/आलम की खबर: बिहार अब तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ग्रीन ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी योजना पर काम शुरू कर दिया है। जून 2026 से बिहार के राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे बड़े पैमाने पर EV यानी इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना शुरू होने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ढाबों, पेट्रोल पंपों, होटलों, सार्वजनिक स्थलों और खाली सरकारी जमीनों पर आधुनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे।

सरकार का मानना है कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य उज्ज्वल है और आने वाले वर्षों में इनकी संख्या तेजी से बढ़ सकती है। लेकिन इसके लिए सबसे बड़ी जरूरत मजबूत चार्जिंग नेटवर्क की है। यही वजह है कि परिवहन विभाग अब पूरे राज्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

परिवहन विभाग की ओर से इस परियोजना को लेकर पूरी तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। विभाग ने मोटर वाहन कंपनियों, पेट्रोलियम कंपनियों और ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स यानी OEM कंपनियों से उन संभावित स्थानों की सूची मांगी है, जहां वे चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना चाहते हैं। इसके लिए 7 जून तक का समय दिया गया है। इसके बाद कंपनियों और सरकार के बीच एमओयू यानी समझौता ज्ञापन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और फिर निर्माण कार्य को गति दी जाएगी।

इस योजना के जरिए बिहार में इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। अभी राज्य में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बेहद सीमित है, जिसके कारण लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने में हिचकिचाते हैं। कई लोगों को डर रहता है कि लंबी दूरी तय करने के दौरान वाहन की बैटरी खत्म हो सकती है और उन्हें चार्जिंग सुविधा नहीं मिलेगी। लेकिन हाईवे और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन बनने के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

बिहार सरकार सिर्फ निजी इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भी इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। परिवहन विभाग के अनुसार केंद्र सरकार जल्द ही बिहार को लगभग 400 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध करा सकती है। इसी क्रम में जून महीने से 100 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

इन बसों के सफल संचालन के लिए चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत बनाना बेहद जरूरी माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि यात्रियों को आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन सुविधा मिले। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से डीजल आधारित वाहनों पर निर्भरता कम होगी और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार जैसे तेजी से विकसित हो रहे राज्य के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भविष्य की जरूरत बन चुकी है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते और टिकाऊ विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। ऐसे में यदि राज्य सरकार समय रहते मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लेती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार EV सेक्टर में बड़ी छलांग लगा सकता है।

इस परियोजना की एक खास बात यह भी है कि राज्य सरकार खाली सरकारी जमीनों का उपयोग भी चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए करेगी। यदि कोई कंपनी सरकारी जमीन पर स्टेशन स्थापित करना चाहती है, तो उसे संबंधित स्थान की जानकारी परिवहन विभाग को देनी होगी। इसके बाद विभाग अन्य सरकारी एजेंसियों और विभागों से समन्वय कर आवश्यक एनओसी दिलाने में सहायता करेगा।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेशकों और कंपनियों को किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा का सामना न करना पड़े। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया को जितना संभव हो सके, उतना सरल और तेज बनाया जाएगा ताकि राज्य में जल्द से जल्द चार्जिंग नेटवर्क तैयार हो सके।

इस पूरी परियोजना को तकनीकी रूप से भी आधुनिक बनाया जा रहा है। परिवहन विभाग एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करेगा, जिसमें बिहार के सभी EV चार्जिंग स्टेशनों की जानकारी उपलब्ध रहेगी। इस प्लेटफॉर्म को गूगल मैप से जोड़ा जाएगा, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन चालक आसानी से अपने नजदीकी चार्जिंग स्टेशन की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

इस डिजिटल सुविधा के जरिए उपयोगकर्ता अपने मोबाइल फोन या वाहन के सिस्टम पर यह देख सकेंगे कि कौन-सा चार्जिंग स्टेशन कितनी दूरी पर है, वहां चार्जिंग स्लॉट उपलब्ध है या नहीं और वहां पहुंचने का सबसे आसान रास्ता कौन-सा है। इससे लोगों को चार्जिंग स्टेशन खोजने में परेशानी नहीं होगी और लंबी यात्रा भी आसान हो सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चार्जिंग नेटवर्क मजबूत होता है तो राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। इससे न सिर्फ प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि ईंधन पर होने वाला खर्च भी कम होगा। साथ ही EV सेक्टर में नए निवेश और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य के लिए जरूरी हैं। बिहार के शहरों में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए ग्रीन ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में यह पहल काफी अहम मानी जा रही है। आने वाले समय में यदि इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ता है तो कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

फिलहाल राज्य सरकार की इस योजना को लेकर लोगों के बीच उत्साह देखा जा रहा है। खासकर युवाओं और नए वाहन खरीदारों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर रुचि तेजी से बढ़ रही है। माना जा रहा है कि यदि चार्जिंग स्टेशन की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो जाती है तो बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से विस्तार कर सकता है।

कुल मिलाकर बिहार सरकार की यह योजना राज्य को आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में आगे ले जाने वाला बड़ा कदम मानी जा रही है। आने वाले महीनों में इस परियोजना की प्रगति पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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